
अंगारक दोष पूजा
मंगल और राहु/केतु के योग से उत्पन्न अस्थिरता को शांत करने का उपाय।
अंगारक दोष पूजा संकल्प
उज्जैन के सिद्ध तीर्थ पर व्यक्तिगत नाम, गोत्र व नक्षत्र द्वारा पूर्ण शास्त्रीय विधि से संकल्प।
उज्जैन आकर व्यक्तिगत पूजन
लाइव वीडियो + प्रसाद कूरियर
अंगारक दोष निवारण पूजा मंगल और राहु/केतु के योग से उत्पन्न गुस्सा, विवाद और अस्थिरता को शांत करने का वैदिक उपाय है।
जब किसी भाव में मंगल के साथ राहु या केतु की युति या दृष्टि हो तो अंगारक योग बनता है। इससे क्रोध, आक्रामकता, रक्तचाप, अग्नि-दुर्घटना भय, कोर्ट-पुलिस विवाद और भाई-साझेदार से भूमि झगड़ा बढ़ सकता है।
मंगलनाथ उज्जैन इस पूजा का स्वाभाविक तीर्थ है। यहाँ मंगल की उष्णता और राहु की छाया दोनों का शमन एक साथ संभव माना गया है। पंडित दीपक पंड्या संयुक्त मंत्र जाप और विशेष वेदी पूजन कराते हैं।
विधि में शुद्धिकरण, संकल्प, लाल-नीले वस्त्रों से वेदी, खैर-दूर्वा समिधा से हवन और मंगल-राहु की वस्तुओं का दान है। अवधि लगभग 3 घंटे रहती है।
मंगलवार, शनिवार और अंगारक चतुर्थी विशेष हैं। जातक को गुस्सा नियंत्रित रखने, सात्त्विक भोजन और काले वस्त्र से बचने का निर्देश दिया जाता है।
यह पूजा उन लोगों के लिए है जो बार-बार झगड़े में फँसते हैं, वाहन दुर्घटना का डर रखते हैं या परिवार में हिंसक तनाव है। पूजा क्रोध को जड़ से मिटाने का दावा नहीं करती, पर वैदिक शांति से मन स्थिर होता है।
सामग्री—लाल-काले तिल, मसूर, ताम्र-सीसा सिक्का, सिंदूर, चमेली तेल, गाय का घी—हमारी व्यवस्था में रहती है। पारदर्शी दक्षिणा पहले बताई जाती है।
यदि साथ में मांगलिक दोष भी हो तो भात पूजा का संयोजन सुझाया जा सकता है। कुंडली परामर्श से अनावश्यक दोहरी पूजा बचती है।
ऑनलाइन संकल्प भी उपलब्ध है। यजमान वीडियो पर संकल्प बोलते हैं और हवन का लाइव दर्शन करते हैं। प्रसाद डाक से जाता है।
उज्जैन की इस विधि से जातक में धैर्य, एकाग्रता और व्यवहार की कोमलता आने लगती है। यही अंगारक शांति का व्यावहारिक फल है।
क्रोध आने पर जल पीना, मौन रखना और लाल वस्तु का दान—ये छोटे नियम पूजा के साथ चलते हैं। आचार्य याद दिलवाते हैं।
वाहन चलाने वाले यजमानों को मंगलवार को विशेष सावधानी और हनुमान स्मरण बताया जाता है। पूजा और व्यवहार साथ चलें।
भूमि विवाद में पूजा कानूनी कागज का विकल्प नहीं। शांति मन की है, दस्तावेज़ वकील से बनवाएँ—यह हम स्पष्ट कहते हैं।
हवन की अग्नि तेज़ रखी जाती है पर आहुति नियंत्रित। अंगारक का अर्थ आग फैलाना नहीं, आग को काबू करना है।
परिवार का कोई शांत सदस्य संकल्प में साथ बैठे तो वातावरण और भी सात्त्विक रहता है। यह सुझाव मात्र है, बाध्यता नहीं।
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