
रुद्रा अभिषेक अनुष्ठान
भगवान शिव को जल, दूध, शहद आदि से स्नान कराकर मन-शरीर की शुद्धि।
रुद्रा अभिषेक अनुष्ठान संकल्प
उज्जैन के सिद्ध तीर्थ पर व्यक्तिगत नाम, गोत्र व नक्षत्र द्वारा पूर्ण शास्त्रीय विधि से संकल्प।
उज्जैन आकर व्यक्तिगत पूजन
लाइव वीडियो + प्रसाद कूरियर
रुद्राभिषेक भगवान शिव को जल, दूध, शहद आदि से स्नान कराते हुए किया जाता है। यह पूजा मन, शरीर और आत्मा को शुद्ध करती है।
शुक्लयजुर्वेदीय रुद्राष्टाध्यायी के आठ अध्यायों का सस्वर पाठ करते हुए पंचामृत, गन्ने का रस और गंगाजल से अभिषेक होता है। दूध से आरोग्य, रस से लक्ष्मी, शहद से पाप मुक्ति, घी से वंश वृद्धि और गंगाजल से मोक्ष का फल कहा गया है।
उज्जैन महाकालेश्वर क्षेत्र या रामघाट पर यह अनुष्ठान 1.5 से 2.5 घंटे में लघु, नमक-चमक रुद्री या एकादश रुद्री के रूप में होता है। जन्मदिन, वर्षगांठ, गृह शांति और मनोकामना हेतु अत्यंत प्रिय है।
विधि में गणेश-अंबिका, पुण्याहवाचन, कलश, रुद्र पाठ, अभिषेक, बिल्व-धतूरा-मदार श्रृंगार, महाआरती और शिव तांडव शामिल हैं। पंडित दीपक पंड्या नाम-गोत्र से संकल्प कराते हैं।
सोमवार, प्रदोष, मासिक शिवरात्रि और अमृत योग उत्तम हैं। काले वस्त्र वर्जित हैं। सामग्री हमारी ओर से शुद्ध रहती है।
यह पूजा पाप क्षय, संतान सुख, धन-धान्य, नकारात्मक ऊर्जा हटाने और शत्रु भय शांत करने के लिए की जाती है। सरल होने के कारण परिवार इसे बार-बार करवाते हैं।
ऑनलाइन अभिषेक का लाइव दर्शन संभव है। जो महाकाल की भस्म आरती भी करना चाहें, उन्हें अलग से दर्शन मार्गदर्शन दिया जाता है।
दक्षिणा लघु से एकादश तक स्पष्ट स्लैब में है। यजमान अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य से चुन सकते हैं, दबाव नहीं दिया जाता।
अभिषेक के जल का स्पर्श और बिल्व पत्र का प्रसाद घर ले जाने से वातावरण सात्त्विक रहता है। आचार्य घर पर छोटी शिवलिंग सेवा भी बता सकते हैं।
रुद्र का अर्थ केवल भय नहीं, करुणा से पाप धोना भी है। उज्जैन में किया रुद्राभिषेक उसी करुणा का स्नान है।
अभिषेक का दूध ताज़ा और गाय का ही प्रयोग होता है। मिलावटी सामग्री से रुद्र पूजन नहीं कराया जाता।
यदि समय कम हो तो लघु रुद्री, यदि परिवार बड़ा उत्सव मनाना चाहे तो एकादश—दोनों की महिमा है, तुलना का अहंकार नहीं।
बिल्व पत्र की गिनती और धारण विधि यजमान को संक्षेप में दिखाई जाती है, ताकि घर पर भी छोटी सेवा हो सके।
महाकाल दर्शन अलग टिकट/पंक्ति का विषय है। हम पूजा और दर्शन का समय टकराए नहीं, यह प्लान पहले बनाते हैं।
रुद्राभिषेक के बाद मन हल्का लगे तो वही पहला फल है। बाकी कामनाएँ समय से पूरी होती हैं।
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