
नव चंडी अनुष्ठान
देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा, जो सुख-शांति और समृद्धि प्रदान करती है।
नव चंडी अनुष्ठान संकल्प
उज्जैन के सिद्ध तीर्थ पर व्यक्तिगत नाम, गोत्र व नक्षत्र द्वारा पूर्ण शास्त्रीय विधि से संकल्प।
उज्जैन आकर व्यक्तिगत पूजन
लाइव वीडियो + प्रसाद कूरियर
नवचंडी अनुष्ठान देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा है, जो भक्त को सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करती है।
दुर्गा सप्तशती के तेरह अध्यायों का नौ बार संपुटित पाठ, अखंड ज्योति, घट स्थापन, कुमारी पूजन, बटुक भैरव पूजन और चंडी महायज्ञ इस विधि के स्तंभ हैं। अवधि 5 से 7 घंटे या नवरात्रि में विस्तृत हो सकती है।
उज्जैन हरसिद्धि शक्तिपीठ—जहाँ माता सती की कोहनी गिरी और विक्रमादित्य ने साधना की—नवचंडी का सिद्ध क्षेत्र है। गृह क्लेश, कुलदेवी कृपा, धन-वैभव और ऊपरी बाधा के लिए यह अनुष्ठान कराया जाता है।
शुक्रवार, मंगलवार, चैत्र-शारदीय नवरात्रि और पूर्णिमा उत्तम हैं। लाल चुनरी, सोलह श्रृंगार, कमल गट्टा और अखंड दीप हमारी सामग्री व्यवस्था में रहते हैं।
पंडित दीपक पंड्या परिवार के नाम-गोत्र से संकल्प कराते हैं। कन्या पूजन और कन्या भोज शास्त्रोक्त ढंग से होता है। दक्षिणा पूर्व स्पष्ट रहती है।
यह अनुष्ठान घर में अखंड सुख, ग्रह दोष शमन, व्यापार वृद्धि और कुल रक्षा का भाव जगाता है। नवरात्रि में इसका फल विशेष माना गया है।
जो उज्जैन नहीं आ सकते उनके लिए पाठ और हवन का लाइव प्रसारण तथा प्रसाद कूरियर उपलब्ध है। दीप और घट उज्जैन में ही स्थापित होते हैं।
यजमान सात्त्विक रहें, मांसाहार-मदिरा से बचें और लाल या पीला वस्त्र पहनें। आचार्य सरल नियम पहले बता देते हैं।
नवचंडी केवल बड़ा आयोजन नहीं, माता की नौ शक्तियों को घर में बुलाने का निमंत्रण है। श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण से यह निमंत्रण पूर्ण होता है।
हरसिद्धि की ज्योति स्तंभ जैसी दिव्यता इस अनुष्ठान को उज्जैन की पहचान बनाती है। मां जगदम्बा का वर इसी भूमि पर माँगा जाता है।
सप्तशती का पाठ शुद्ध उच्चारण से होता है। जल्दी-जल्दी पृष्ठ पलटना हम नहीं करते। एक अध्याय पूरा और स्पष्ट रहे।
अखंड ज्योति की घी-बाती पहले से नापकर रखी जाती है, ताकि बीच में बुझे नहीं। यह छोटा अनुशासन बड़ा फल देता है।
कन्याओं का आदर, भोजन और दक्षिणा शास्त्र के अनुकूल रहता है। दिखावे की भीड़ नहीं जुटाई जाती।
नवरात्रि में कमरे पहले बुक कर लें। हम ठहरने के सादे विकल्प बता सकते हैं, अनिवार्य पैकेज नहीं बेचते।
मां चंडी घर में तब बसती हैं जब परिवार का स्वर कोमल हो। पूजा के बाद एक सप्ताह क्रोध कम रखें—यही सबसे सस्ता उपाय है।
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