नव चंडी अनुष्ठान
उज्जैन पावन तीर्थ संकल्पचित्र 1 / 3
मां भगवती जगदम्बा दुर्गा एवं मां हरसिद्धि

नव चंडी अनुष्ठान

देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा, जो सुख-शांति और समृद्धि प्रदान करती है।

पूजन अवधि
5 से 7 घंटे (अथवा 9 पाठ विधान)
तीर्थ स्थल
मां हरसिद्धि शक्तिपीठ मंदिर, उज्जैन
शुभ दिवस
शुक्रवार, मंगलवार
वैदिक संकल्प
100% शास्त्रीय
वैदिक तीर्थ पुरोहित सेवा

नव चंडी अनुष्ठान संकल्प

उज्जैन के सिद्ध तीर्थ पर व्यक्तिगत नाम, गोत्र व नक्षत्र द्वारा पूर्ण शास्त्रीय विधि से संकल्प।

उपलब्ध पूजन माध्यम:
प्रत्यक्ष दर्शन

उज्जैन आकर व्यक्तिगत पूजन

ऑनलाइन लाइव

लाइव वीडियो + प्रसाद कूरियर

कोई पूर्व अग्रिम राशि बाध्यता नहीं • व्यक्तिगत संकल्प
पूजा के पश्चात वैदिक रसीद व संकल्प पत्र उपलब्ध
शुद्ध पूजन सामग्री एवं संपूर्ण वैदिक व्यवस्था आचार्य द्वारा
तीर्थ पुरोहित सहायता केंद्र
उज्जैन में ठहरने व दर्शन हेतु निःशुल्क मार्गदर्शन
विस्तृत परिचय एवं आध्यात्मिक महत्व

नवचंडी अनुष्ठान देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा है, जो भक्त को सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करती है।

दुर्गा सप्तशती के तेरह अध्यायों का नौ बार संपुटित पाठ, अखंड ज्योति, घट स्थापन, कुमारी पूजन, बटुक भैरव पूजन और चंडी महायज्ञ इस विधि के स्तंभ हैं। अवधि 5 से 7 घंटे या नवरात्रि में विस्तृत हो सकती है।

उज्जैन हरसिद्धि शक्तिपीठ—जहाँ माता सती की कोहनी गिरी और विक्रमादित्य ने साधना की—नवचंडी का सिद्ध क्षेत्र है। गृह क्लेश, कुलदेवी कृपा, धन-वैभव और ऊपरी बाधा के लिए यह अनुष्ठान कराया जाता है।

शुक्रवार, मंगलवार, चैत्र-शारदीय नवरात्रि और पूर्णिमा उत्तम हैं। लाल चुनरी, सोलह श्रृंगार, कमल गट्टा और अखंड दीप हमारी सामग्री व्यवस्था में रहते हैं।

पंडित दीपक पंड्या परिवार के नाम-गोत्र से संकल्प कराते हैं। कन्या पूजन और कन्या भोज शास्त्रोक्त ढंग से होता है। दक्षिणा पूर्व स्पष्ट रहती है।

यह अनुष्ठान घर में अखंड सुख, ग्रह दोष शमन, व्यापार वृद्धि और कुल रक्षा का भाव जगाता है। नवरात्रि में इसका फल विशेष माना गया है।

जो उज्जैन नहीं आ सकते उनके लिए पाठ और हवन का लाइव प्रसारण तथा प्रसाद कूरियर उपलब्ध है। दीप और घट उज्जैन में ही स्थापित होते हैं।

यजमान सात्त्विक रहें, मांसाहार-मदिरा से बचें और लाल या पीला वस्त्र पहनें। आचार्य सरल नियम पहले बता देते हैं।

नवचंडी केवल बड़ा आयोजन नहीं, माता की नौ शक्तियों को घर में बुलाने का निमंत्रण है। श्रद्धा और शुद्ध उच्चारण से यह निमंत्रण पूर्ण होता है।

हरसिद्धि की ज्योति स्तंभ जैसी दिव्यता इस अनुष्ठान को उज्जैन की पहचान बनाती है। मां जगदम्बा का वर इसी भूमि पर माँगा जाता है।

सप्तशती का पाठ शुद्ध उच्चारण से होता है। जल्दी-जल्दी पृष्ठ पलटना हम नहीं करते। एक अध्याय पूरा और स्पष्ट रहे।

अखंड ज्योति की घी-बाती पहले से नापकर रखी जाती है, ताकि बीच में बुझे नहीं। यह छोटा अनुशासन बड़ा फल देता है।

कन्याओं का आदर, भोजन और दक्षिणा शास्त्र के अनुकूल रहता है। दिखावे की भीड़ नहीं जुटाई जाती।

नवरात्रि में कमरे पहले बुक कर लें। हम ठहरने के सादे विकल्प बता सकते हैं, अनिवार्य पैकेज नहीं बेचते।

मां चंडी घर में तब बसती हैं जब परिवार का स्वर कोमल हो। पूजा के बाद एक सप्ताह क्रोध कम रखें—यही सबसे सस्ता उपाय है।

॥ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
पूजन के प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांसारिक लाभ
सर्व मनोकामना सिद्धि एवं नौ देवियों का संपूर्ण वरदान
घर में अखंड सुख, शांति, वैभव और ऐश्वर्य का वास
ग्रह दोषों, ऊपरी बाधाओं व नकारात्मक शक्तियों का शमन
व्यापार में अप्रत्याशित वृद्धि व कुल की रक्षा
सप्तशती के संपुटित पाठ व अखंड ज्योति का अनुशासन
हरसिद्धि शक्तिपीठ पर कुमारी पूजन सहित पूर्ण विधि
यह पूजन किन जातकों के लिए अनिवार्य है:
गृह क्लेश मुक्तिपरिवार की कुलदेवी कृपानवरात्रि विशेष अनुष्ठानधन-वैभव प्राप्ति
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