
अर्क विवाह (कुंभ विवाह)
मांगलिक दोष को समाप्त कर वैवाहिक जीवन को सुखद बनाने वाला अनुष्ठान।
अर्क विवाह (कुंभ विवाह) संकल्प
उज्जैन के सिद्ध तीर्थ पर व्यक्तिगत नाम, गोत्र व नक्षत्र द्वारा पूर्ण शास्त्रीय विधि से संकल्प।
उज्जैन आकर व्यक्तिगत पूजन
लाइव वीडियो + प्रसाद कूरियर
अर्क विवाह मांगलिक दोष को समाप्त करने में सहायक होता है और वैवाहिक जीवन को सुखद और स्थिर बनाता है।
शास्त्रों में कहा गया है कि अति प्रबल मांगलिक जातक का पहला सांकेतिक विवाह वृक्ष या कलश से कराया जाए, ताकि जीवनसाथी पर मंगल की उष्णता न पड़े। पुरुष के लिए अर्क (मदार) और कन्या के लिए कुंभ-पीपल विधान है।
यह अनुष्ठान उन जातकों के लिए है जिनमें वैधव्य योग, द्विभार्या योग, विवाह में अत्यधिक विलंब या तलाक जैसी स्थिति दिखती है। 30 वर्ष बाद भी विवाह न होने पर भी यह विधि सुझाई जाती है।
उज्जैन में मंगलनाथ या सिद्धवट पर गणपति, नवग्रह, मातृका पूजन के बाद वृक्ष या घट का श्रृंगार, पाणिग्रहण मंत्र, हवन, लाजा होम और सप्तपदी होती है। अंत में विधिवत विसर्जन और ब्राह्मण आशीर्वाद होता है।
अवधि 2.5 से 3.5 घंटे रहती है। मंगलवार, शनिवार, अमृत सिद्धि योग और शुभ विवाह मुहूर्त उत्तम हैं। सामग्री—अर्क पौधा या ताम्र कलश, वैवाहिक वस्त्र, हवन समिधा—हमारी ओर से रहती है।
यह वास्तविक विवाह नहीं, दोष शमन का संस्कार है। इसके बाद वास्तविक विवाह शास्त्रोक्त मुहूर्त में निर्भय होकर किया जा सकता है। परिवार को लज्जा की कोई बात नहीं, यह प्राचीन वैदिक उपाय है।
पंडित दीपक पंड्या कुंडली देखकर बताते हैं कि केवल अर्क विवाह पर्याप्त है या साथ में मंगल भात पूजा भी करनी चाहिए। दोनों का संयोजन भारी मांगलिक में अधिक फलदायी माना जाता है।
ऑनलाइन संकल्प में यजमान वीडियो पर उपस्थित रहकर नाम-गोत्र बोलते हैं। वृक्ष-घट पूजन उज्जैन में होता है और प्रसाद घर भेजा जाता है।
पूजा के दिन सात्त्विक वस्त्र, उपवास या फलाहार और शांत मन रखना चाहिए। काला वस्त्र वर्जित है। दक्षिणा पूर्व निर्धारित रहती है।
सही विधि से किया गया अर्क-कुंभ विवाह दांपत्य में अखंड सौभाग्य, सामंजस्य और वंश वृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।
वृक्ष या घट का चयन ताज़ा और साफ़ होता है। सूखा या टूटा पौधा संस्कार के योग्य नहीं माना जाता।
संस्कार के मंत्र विवाह जैसे लगते हैं, पर भाव दोष-शमन का है। परिवार को पहले यह स्पष्ट समझा दिया जाता है, भ्रम नहीं रहता।
यदि कुंडली में मंगल के साथ अन्य विवाह बाधा हो तो आचार्य क्रम बताते हैं—पहले अर्क, फिर भात या नवग्रह।
ऑनलाइन यजमान पीला या लाल वस्त्र पहनकर वीडियो पर बैठें, रोली-अक्षत पास रखें। संकल्प उसी से पूर्ण माना जाता है।
इस विधि के बाद वास्तविक विवाह में अनावश्यक भय छोड़कर शुभ कार्य आगे बढ़ाया जा सकता है। यही इसका सामाजिक लाभ है।
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