
गुरु चांडाल दोष
विद्वान ब्राह्मणों द्वारा विधि-विधान से कराया जाने वाला वैदिक अनुष्ठान।
गुरु चांडाल दोष संकल्प
उज्जैन के सिद्ध तीर्थ पर व्यक्तिगत नाम, गोत्र व नक्षत्र द्वारा पूर्ण शास्त्रीय विधि से संकल्प।
उज्जैन आकर व्यक्तिगत पूजन
लाइव वीडियो + प्रसाद कूरियर
गुरु चांडाल दोष पूजा एक विशेष वैदिक अनुष्ठान है, जिसे विद्वान ब्राह्मणों द्वारा विधि-विधान से कराया जाता है।
जब जन्म कुंडली में देवगुरु बृहस्पति के साथ राहु की युति या तीव्र दृष्टि हो तो गुरु चांडाल योग बनता है। इससे बुद्धि भ्रमित होती है, सही-गलत का विवेक घटता है और अचानक अपमान या आर्थिक हानि हो सकती है।
उज्जैन महाकाल क्षेत्र या बृहस्पति स्थान पर यह शांति विशेष मानी जाती है। पंडित दीपक पंड्या बृहस्पति यंत्र और राहु यंत्र स्थापित कर 19,000 गुरु बीज और 18,000 राहु बीज का जाप कराते हैं।
पीले वस्त्र, चने की दाल, हल्दी, केसर और पुखराज का शुद्धिकरण, दशांश हवन, गुरु चांडाल शांति स्तोत्र और ब्राह्मण भोजन विधि के अंग हैं। अवधि 3 से 4 घंटे रहती है।
यह पूजा शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, प्रशासनिक पद, व्यापारिक निर्णय और पारिवारिक प्रतिष्ठा के लिए की जाती है। गलत संगति और मुकदमों में फँसने की प्रवृत्ति पर भी यह शांति काम आती है।
गुरुवार, पुष्य नक्षत्र और पूर्णिमा उत्तम मुहूर्त हैं। जातक पीला वस्त्र धारण करें। राहु शांति हेतु काले तिल और उड़द का दान भी होता है।
केवल रत्न पहन लेना पर्याप्त नहीं। पहले दोष की तीव्रता देखी जाती है, फिर जप-हवन और दान का क्रम तय होता है। बिना कुंडली जाँच के महँगा रत्न धारण नहीं सुझाया जाता।
ऑनलाइन संकल्प में लाइव दर्शन और बाद में अभिमंत्रित पीला रक्षा सूत्र भेजा जा सकता है। प्रत्यक्ष पूजा में यजमान हवन में आहुति भी दे सकते हैं।
पूजा के बाद गुरुवार व्रत, पीली दाल दान और सत्य भाषण का संकल्प लेने से फल स्थिर रहता है। आचार्य इसका सरल दैनिक क्रम बताते हैं।
उज्जैन में की गई यह शांति बुद्धि को पुनः सात्त्विक बनाती है, जिससे जातक सही मार्ग चुनकर जीवन में सम्मान और स्थिर प्रगति पाता है।
गुरु की शांति में सत्य, विद्या और गुरुजन के प्रति आदर सबसे बड़ा व्रत है। केवल हवन से काम अधूरा रहता है।
यदि छात्र परीक्षा की तैयारी में हो तो पूजा के साथ दैनिक गायत्री या गुरु मंत्र का छोटा जाप भी बताया जाता है।
व्यापारी जातकों को गलत साझेदारी और जल्दबाज़ी के सौदे टालने की व्यावहारिक सलाह कुंडली के साथ दी जाती है।
पीले वस्त्र का दान और चने की दाल का दान गुरुवार को जारी रखने से शांति टिकती है। यह सस्ता और सरल उपाय है।
उज्जैन में गुरु-राहु दोनों की ऊर्जा का संतुलन महाकाल क्षेत्र की सात्त्विकता से सहज हो जाता है। यही इस तीर्थ की विशेषता है।
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