
मंगल भात पूजा
मंगल दोष के कारण विवाह में देरी और पारिवारिक समस्याओं का समाधान।
मंगल भात पूजा संकल्प
उज्जैन के सिद्ध तीर्थ पर व्यक्तिगत नाम, गोत्र व नक्षत्र द्वारा पूर्ण शास्त्रीय विधि से संकल्प।
उज्जैन आकर व्यक्तिगत पूजन
लाइव वीडियो + प्रसाद कूरियर
कुंडली में मंगल दोष के कारण विवाह में देरी, पारिवारिक कलह और करियर समस्याएँ आती हैं। मंगलनाथ मंदिर उज्जैन में किया गया यह पूजन मंगल दोष को शांत करता है।
मत्स्य पुराण के अनुसार मंगलनाथ मंगल ग्रह की जन्मभूमि है। कर्क रेखा इसी मंदिर के ऊपर से गुजरती है। मंगल का स्वभाव उष्ण है, इसलिए उन्हें शीतल भात अर्पित कर शांत किया जाता है। विश्व में यही आदि तीर्थ मंगल भात पूजा के लिए प्रसिद्ध है।
मांगलिक दोष लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल होने से बनता है। इससे विवाह विलंब, रिश्ते टूटना, दांपत्य कलह, रक्त विकार, दुर्घटना भय, भूमि विवाद और कर्ज की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।
विधि में संकल्प, गणेश-गौरी पूजन, पंचामृत अभिषेक, सुगंधित भात का लेपन, मंगल मंत्र जप, दशांश हवन और लाल वस्त्र-मसूर-गुड़ का दान शामिल है। अवधि लगभग 2 से 3 घंटे रहती है।
मंगलवार, भौम प्रदोष, अंगारक चतुर्थी और मंगल-पुष्य योग विशेष फलदायी हैं। वर-वधू दोनों या अकेले मांगलिक जातक संकल्प ले सकते हैं। ऑनलाइन लाइव संकल्प भी होता है।
सामग्री—बासमती भात, केसर, लाल चंदन, सिंदूर, ताम्र पात्र, पंचामृत—पंडित दीपक पंड्या की ओर से व्यवस्थित रहती है। यजमान को कुछ लाने की आवश्यकता नहीं।
पूजा के बाद कई परिवारों में रिश्ते आगे बढ़े, कलह कम हुई और मानसिक उष्मा शांत हुई। यह चमत्कार का दावा नहीं, शास्त्रोक्त श्रद्धा और सही मुहूर्त का परिणाम है।
भारी मांगलिक में भात पूजा के साथ अर्क-कुंभ विवाह या नवग्रह शांति भी सुझाई जा सकती है। पहले कुंडली परामर्श लेना उत्तम रहता है।
उज्जैन आने पर ठहरने, दर्शन समय और मंदिर पंक्ति का निःशुल्क मार्गदर्शन मिलता है। प्रत्यक्ष पूजा में समय से 7 से 15 मिनट पूर्व पहुँचें।
मंगल दोष डरने की वस्तु नहीं, विधि से शांत करने की वस्तु है। मंगलनाथ पर भात अर्पण उसी शांति का सबसे प्रामाणिक मार्ग माना गया है।
भात पकाने की विधि सात्त्विक रखी जाती है—केसर, इलायची और शुद्ध घी से सुगंध। बाजारू रंग-रसायन नहीं डाला जाता।
मंगलनाथ परिसर में भीड़ के दिन समय स्लॉट बाँटकर बुकिंग होती है, ताकि हर यजमान को पर्याप्त समय मिले, हड़बड़ी न हो।
यदि वर एक नगर में हो और कन्या दूसरे में, तो एक पक्ष उज्जैन आकर संकल्प ले सकता है, दूसरा ऑनलाइन जुड़ सकता है।
पूजा के बाद लाल धागा और थोड़ा प्रसाद घर की पूजा स्थान पर रखना चाहिए। आचार्य यह छोटी घरेलू सेवा बताते हैं।
मंगल दोष को गाली नहीं, ऊर्जा समझें। सही तीर्थ पर सही अर्पण से वही ऊर्जा रक्षक बन जाती है। यही भात पूजा सिखाती है।
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