मंगल भात पूजा
उज्जैन पावन तीर्थ संकल्पचित्र 1 / 2
अंगारक भगवान मंगल देव (शिव स्वरूप)

मंगल भात पूजा

मंगल दोष के कारण विवाह में देरी और पारिवारिक समस्याओं का समाधान।

पूजन अवधि
2 से 3 घंटे
तीर्थ स्थल
श्री मंगलनाथ मंदिर
शुभ दिवस
मंगलवार, भौम प्रदोष
वैदिक संकल्प
100% शास्त्रीय
वैदिक तीर्थ पुरोहित सेवा

मंगल भात पूजा संकल्प

उज्जैन के सिद्ध तीर्थ पर व्यक्तिगत नाम, गोत्र व नक्षत्र द्वारा पूर्ण शास्त्रीय विधि से संकल्प।

उपलब्ध पूजन माध्यम:
प्रत्यक्ष दर्शन

उज्जैन आकर व्यक्तिगत पूजन

ऑनलाइन लाइव

लाइव वीडियो + प्रसाद कूरियर

कोई पूर्व अग्रिम राशि बाध्यता नहीं • व्यक्तिगत संकल्प
पूजा के पश्चात वैदिक रसीद व संकल्प पत्र उपलब्ध
शुद्ध पूजन सामग्री एवं संपूर्ण वैदिक व्यवस्था आचार्य द्वारा
तीर्थ पुरोहित सहायता केंद्र
उज्जैन में ठहरने व दर्शन हेतु निःशुल्क मार्गदर्शन
विस्तृत परिचय एवं आध्यात्मिक महत्व

कुंडली में मंगल दोष के कारण विवाह में देरी, पारिवारिक कलह और करियर समस्याएँ आती हैं। मंगलनाथ मंदिर उज्जैन में किया गया यह पूजन मंगल दोष को शांत करता है।

मत्स्य पुराण के अनुसार मंगलनाथ मंगल ग्रह की जन्मभूमि है। कर्क रेखा इसी मंदिर के ऊपर से गुजरती है। मंगल का स्वभाव उष्ण है, इसलिए उन्हें शीतल भात अर्पित कर शांत किया जाता है। विश्व में यही आदि तीर्थ मंगल भात पूजा के लिए प्रसिद्ध है।

मांगलिक दोष लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल होने से बनता है। इससे विवाह विलंब, रिश्ते टूटना, दांपत्य कलह, रक्त विकार, दुर्घटना भय, भूमि विवाद और कर्ज की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।

विधि में संकल्प, गणेश-गौरी पूजन, पंचामृत अभिषेक, सुगंधित भात का लेपन, मंगल मंत्र जप, दशांश हवन और लाल वस्त्र-मसूर-गुड़ का दान शामिल है। अवधि लगभग 2 से 3 घंटे रहती है।

मंगलवार, भौम प्रदोष, अंगारक चतुर्थी और मंगल-पुष्य योग विशेष फलदायी हैं। वर-वधू दोनों या अकेले मांगलिक जातक संकल्प ले सकते हैं। ऑनलाइन लाइव संकल्प भी होता है।

सामग्री—बासमती भात, केसर, लाल चंदन, सिंदूर, ताम्र पात्र, पंचामृत—पंडित दीपक पंड्या की ओर से व्यवस्थित रहती है। यजमान को कुछ लाने की आवश्यकता नहीं।

पूजा के बाद कई परिवारों में रिश्ते आगे बढ़े, कलह कम हुई और मानसिक उष्मा शांत हुई। यह चमत्कार का दावा नहीं, शास्त्रोक्त श्रद्धा और सही मुहूर्त का परिणाम है।

भारी मांगलिक में भात पूजा के साथ अर्क-कुंभ विवाह या नवग्रह शांति भी सुझाई जा सकती है। पहले कुंडली परामर्श लेना उत्तम रहता है।

उज्जैन आने पर ठहरने, दर्शन समय और मंदिर पंक्ति का निःशुल्क मार्गदर्शन मिलता है। प्रत्यक्ष पूजा में समय से 7 से 15 मिनट पूर्व पहुँचें।

मंगल दोष डरने की वस्तु नहीं, विधि से शांत करने की वस्तु है। मंगलनाथ पर भात अर्पण उसी शांति का सबसे प्रामाणिक मार्ग माना गया है।

भात पकाने की विधि सात्त्विक रखी जाती है—केसर, इलायची और शुद्ध घी से सुगंध। बाजारू रंग-रसायन नहीं डाला जाता।

मंगलनाथ परिसर में भीड़ के दिन समय स्लॉट बाँटकर बुकिंग होती है, ताकि हर यजमान को पर्याप्त समय मिले, हड़बड़ी न हो।

यदि वर एक नगर में हो और कन्या दूसरे में, तो एक पक्ष उज्जैन आकर संकल्प ले सकता है, दूसरा ऑनलाइन जुड़ सकता है।

पूजा के बाद लाल धागा और थोड़ा प्रसाद घर की पूजा स्थान पर रखना चाहिए। आचार्य यह छोटी घरेलू सेवा बताते हैं।

मंगल दोष को गाली नहीं, ऊर्जा समझें। सही तीर्थ पर सही अर्पण से वही ऊर्जा रक्षक बन जाती है। यही भात पूजा सिखाती है।

॥ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
पूजन के प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांसारिक लाभ
प्रबल मांगलिक दोष (1, 4, 7, 8, 12वें भाव) का पूर्ण शमन
विवाह में आ रही अड़चनों, संबंध विच्छेद व देरी का निवारण
पति-पत्नी के बीच कलह समाप्त कर मधुरता व सामंजस्य
रक्त विकार, दुर्घटना भय व कर्ज से मुक्ति
मंगलनाथ जन्मभूमि पर शीतल भात अर्पण की प्रामाणिक विधि
वर-वधू अलग नगर हों तो मिश्रित ऑनलाइन-प्रत्यक्ष संकल्प
यह पूजन किन जातकों के लिए अनिवार्य है:
मांगलिक वर/कन्याविवाह में अत्यधिक विलंबदांपत्य जीवन में तनावभूमि-संपत्ति विवादकर्ज मुक्ति
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