ग्रहण दोष पूजा
उज्जैन पावन तीर्थ संकल्पचित्र 1 / 3
सूर्य देव, चंद्र देव एवं भगवान शिव

ग्रहण दोष पूजा

सूर्य या चंद्र ग्रहण के प्रभाव से उत्पन्न नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने का उपाय।

पूजन अवधि
2.5 से 3 घंटे
तीर्थ स्थल
रामघाट शिप्रा तट / मंगलनाथ मंदिर, उज्जैन
शुभ दिवस
सोमवार, रविवार
वैदिक संकल्प
100% शास्त्रीय
वैदिक तीर्थ पुरोहित सेवा

ग्रहण दोष पूजा संकल्प

उज्जैन के सिद्ध तीर्थ पर व्यक्तिगत नाम, गोत्र व नक्षत्र द्वारा पूर्ण शास्त्रीय विधि से संकल्प।

उपलब्ध पूजन माध्यम:
प्रत्यक्ष दर्शन

उज्जैन आकर व्यक्तिगत पूजन

ऑनलाइन लाइव

लाइव वीडियो + प्रसाद कूरियर

कोई पूर्व अग्रिम राशि बाध्यता नहीं • व्यक्तिगत संकल्प
पूजा के पश्चात वैदिक रसीद व संकल्प पत्र उपलब्ध
शुद्ध पूजन सामग्री एवं संपूर्ण वैदिक व्यवस्था आचार्य द्वारा
तीर्थ पुरोहित सहायता केंद्र
उज्जैन में ठहरने व दर्शन हेतु निःशुल्क मार्गदर्शन
विस्तृत परिचय एवं आध्यात्मिक महत्व

ग्रहण दोष निवारण पूजा सूर्य या चंद्र ग्रहण के प्रभाव से उत्पन्न नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने का प्रभावी उपाय है।

सूर्य के साथ राहु/केतु से सूर्य ग्रहण योग और चंद्र के साथ राहु/केतु से चंद्र ग्रहण योग बनता है। पहले से पिता, प्रतिष्ठा और हृदय प्रभावित होते हैं; दूसरे से मन, माता, निद्रा और भावनाएँ।

उज्जैन रामघाट या मंगलनाथ पर शिप्रा स्नान, प्रायश्चित संकल्प, सूर्य/चंद्र यंत्र अभिषेक, गायत्री या चंद्र मूल जप, आदित्य हृदय पाठ और दशांश हवन होता है। चांदी का चंद्र या तांबे का सूर्य दान विधि का अंग है।

अवधि 2.5 से 3 घंटे है। सोमवार, रविवार, ग्रहण काल, पूर्णिमा और अमावस्या विशेष हैं। वास्तविक ग्रहण तिथि पर स्नान-दान का महत्त्व और भी बढ़ जाता है।

यह पूजा आत्मविश्वास की कमी, अवसाद, चिंता, नेत्र-हृदय कमजोरी और सरकारी नौकरी की रुकावट के लिए सुझाई जाती है। माता-पिता के स्वास्थ्य में सुधार की कामना से भी यह करवाई जाती है।

पंडित दीपक पंड्या कुंडली देखकर बताते हैं कि सूर्य पक्ष की शांति चाहिए या चंद्र पक्ष की, अथवा दोनों। गलत एकतरफा उपाय से लाभ अधूरा रहता है।

यजमान सात्त्विक वस्त्र पहनें। ग्रहण काल में भोजन-शयन के शास्त्रोक्त नियम सरल भाषा में बताए जाते हैं, ताकि भय नहीं, समझ बने।

ऑनलाइन संकल्प में लाइव अभिषेक दिखाया जाता है। जो उज्जैन आते हैं उन्हें घाट और मुहूर्त का मार्गदर्शन मिलता है।

पूजा के बाद नियमित सूर्य नमस्कार या सोमवार व्रत का छोटा अभ्यास फल को स्थिर करता है। आचार्य यजमान की शक्ति के अनुसार ही व्रत बताते हैं।

उज्जैन की शिप्रा और महाकाल ऊर्जा ग्रहण जनित मलिनता को धोकर मन को पुनः प्रकाश देती है। यही इस पूजा का आध्यात्मिक सार है।

सूर्य पक्ष की शांति में लाल वस्त्र और ताम्र दान, चंद्र पक्ष में श्वेत वस्त्र और चांदी/चावल दान—यह भेद हम पहले बता देते हैं।

मानसिक तनाव वाले यजमानों को जल्दबाज़ी वाला लंबा अनुष्ठान नहीं थोपा जाता। लघु शांति से आरंभ भी हो सकता है।

ग्रहण के दिन जल, तुलसी और नाम जप घर पर भी चल सकता है। उज्जैन पूजा उसके साथ जुड़कर पूरा चक्र बनती है।

माता-पिता दूर हों तो उनके नाम से तर्पण-सा छोटा अंश भी जोड़ा जा सकता है। आचार्य कुंडली देखकर तय करते हैं।

यह पूजा अंधविश्वास फैलाने के लिए नहीं, ग्रहण योग की भारी छाया को हल्का करने के लिए है। समझ के साथ करवाएँ।

॥ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
पूजन के प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांसारिक लाभ
सूर्य-राहु (सूर्य ग्रहण) अथवा चंद्र-केतु (चंद्र ग्रहण) जनित पीड़ा से मुक्ति
माता-पिता के स्वास्थ्य में सुधार और संबंधों में प्रगाढ़ता
आत्मविश्वास की कमी, डिप्रेशन व निरंतर चिंता का अंत
नेत्र विकार, हृदय रोग व अस्थि दुर्बलता से आरोग्य लाभ
सूर्य व चंद्र पक्ष की अलग-अलग शांति, मिलावट नहीं
मन, माता-पिता व प्रतिष्ठा की पीड़ा हेतु शिप्रा स्नान संकल्प
यह पूजन किन जातकों के लिए अनिवार्य है:
कुंडली में सूर्य+राहु/केतुकुंडली में चंद्र+राहु/केतुमानसिक अशांति व अवसादसरकारी नौकरी में रुकावट
उज्जैन के अन्य महत्वपूर्ण अनुष्ठान

अन्य 13 प्रमुख पूजन सेवाएं

सभी देखें
कॉल करेंWhatsApp