पितृ दोष पूजा
उज्जैन पावन तीर्थ संकल्पचित्र 1 / 2
भगवान सिद्धेश्वर महादेव, यमराज एवं पितृ देव

पितृ दोष पूजा

सिद्धवट धाम उज्जैन में किया जाने वाला अत्यंत प्रभावी पितृदोष निवारण पूजन।

पूजन अवधि
2.5 से 3.5 घंटे
तीर्थ स्थल
श्री सिद्धवट मंदिर
शुभ दिवस
सर्वपितृ अमावस्या, प्रत्येक मास की अमावस्या
वैदिक संकल्प
100% शास्त्रीय
वैदिक तीर्थ पुरोहित सेवा

पितृ दोष पूजा संकल्प

उज्जैन के सिद्ध तीर्थ पर व्यक्तिगत नाम, गोत्र व नक्षत्र द्वारा पूर्ण शास्त्रीय विधि से संकल्प।

उपलब्ध पूजन माध्यम:
प्रत्यक्ष दर्शन

उज्जैन आकर व्यक्तिगत पूजन

ऑनलाइन लाइव

लाइव वीडियो + प्रसाद कूरियर

कोई पूर्व अग्रिम राशि बाध्यता नहीं • व्यक्तिगत संकल्प
पूजा के पश्चात वैदिक रसीद व संकल्प पत्र उपलब्ध
शुद्ध पूजन सामग्री एवं संपूर्ण वैदिक व्यवस्था आचार्य द्वारा
तीर्थ पुरोहित सहायता केंद्र
उज्जैन में ठहरने व दर्शन हेतु निःशुल्क मार्गदर्शन
विस्तृत परिचय एवं आध्यात्मिक महत्व

पितृदोष के कारण जीवन में बाधाएँ आती हैं। सिद्धवट धाम उज्जैन में किया गया पितृदोष निवारण पूजन अत्यंत प्रभावी माना जाता है।

जैसे गया में पिंडदान प्रसिद्ध है, वैसे ही उज्जैन सिद्धवट शक्तिभेद तीर्थ है। मान्यता है कि माता सीता ने भी यहाँ पिंडदान किया था। अतृप्त पूर्वजों को सद्गति यहीं से मिलती है।

लक्षणों में संतान न होना, गर्भपात, मांगलिक कार्यों में विघ्न, घर में बीमारी, धन का व्यर्थ व्यय और अमावस्या जन्म शामिल हैं। कुंडली में पितृ दोष दिखने पर यह पूजा अनिवार्य मानी जाती है।

विधि में शिप्रा तर्पण, सिद्धवट पर पिंडदान, आवश्यकतानुसार नारायण बलि या नागबलि, हवन और ब्राह्मण को अन्न-वस्त्र-छाता-चप्पल दान है। अवधि 2.5 से 3.5 घंटे रहती है।

यह केवल पितृपक्ष तक सीमित नहीं। प्रत्येक अमावस्या, सोमवती अमावस्या, शनिवार या सोमवार भी फलदायी है। पंडित दीपक पंड्या तिथि के अनुसार सही विधान चुनते हैं।

सामग्री—जौ, काले तिल, कुश, सफेद वस्त्र, पंचामृत—हम जुटाते हैं। यजमान को भार नहीं उठाना पड़ता। दक्षिणा तर्पण, त्रिपिंडी या नारायण बलि के स्तर से तय होती है।

परिवार का कोई भी सदस्य नाम-गोत्र से संकल्प ले सकता है। विदेश में बसे लोग ऑनलाइन तर्पण दर्शन कर सकते हैं। पिंडदान स्थल पर होता है।

पूजा के बाद पितरों के प्रति कृतज्ञता, वार्षिक श्राद्ध और गौ-ग्रास का छोटा नियम फल को स्थायी बनाता है। आचार्य घर बैठे सरल उपाय भी बताते हैं।

यह अनुष्ठान भय फैलाने के लिए नहीं, पूर्वजों को मोक्ष और परिवार को आशीर्वाद देने के लिए है। उज्जैन की शिप्रा उसी आशीर्वाद की धारा है।

सिद्धवट की छाया में किया तर्पण वंश में शांति, संतान सुख और घर की स्थिरता लौटाता है। यही पितृ दोष पूजा का परम फल है।

पिंड की संख्या और गोत्र उच्चारण दो बार दोहराया जाता है, ताकि कोई नाम छूटे नहीं। संयुक्त परिवार में यह सावधानी जरूरी है।

नदी किनारे फिसलन और भीड़ रहती है। बुजुर्ग यजमानों के लिए हम स्थिर स्थान और कम चलने वाला क्रम रखते हैं।

यदि गया की यात्रा बाद में करनी हो तो सिद्धवट का तर्पण उसके विपरीत नहीं, पूरक माना जाता है। भय मत पालें।

श्राद्ध का अन्न सात्त्विक और ताज़ा होता है। बचा भोजन अपमानजनक ढंग से नहीं फेंका जाता, विधि से निपटाया जाता है।

पितर प्रसन्न हों तो घर का शोर कम होता है। यह शांति ही सबसे बड़ा प्रमाण है कि तर्पण पहुँच गया।

॥ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके । शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥
पूजन के प्रमुख आध्यात्मिक एवं सांसारिक लाभ
पूर्वजों (पितरों) को सद्गति, मोक्ष एवं उनका अमूल्य आशीर्वाद
संतान न होना, बार-बार गर्भपात अथवा वंश वृद्धि में रुकावट का समाधान
घर में लगातार अशांति, आकस्मिक बीमारी व धन के व्यर्थ व्यय पर विराम
परिवार के सभी सदस्यों को मानसिक शांति व सुख-समृद्धि
सिद्धवट-शिप्रा पर पिंडदान, गया का पूरक सिद्ध तीर्थ
अमावस्या के अतिरिक्त अन्य शुभ दिनों पर भी तर्पण
यह पूजन किन जातकों के लिए अनिवार्य है:
अमावस्या पर जन्मे जातकसंतानहीनता / वंश वृद्धि रुकावटअतृप्त पूर्वज दोषघर में मांगलिक कार्यों में विघ्न
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